राजा और बंदर की कहानी the king and polish monkey बाल कहनी बिल्ली का न्याय
राजा और बंदर की कहानी the king and polish monkey
Siraj uddeen alvi
किसी राजा के महल में एक बंदर सेवक के रूप में रहता था वह राजा का बहुत विश्वासपात्र मित्र भक्त था वह बेरोकटोक जा सकता था
एक दिन जब राजा सो रहा था और बंदर राजा को पंखे से हवा कर रहा था तो बंदर ने देखा एक मक्खी बार-बार राजा की नाक पर बैठ जाती थी पंखे से बार-बार हटाने पर भी वह नहीं मानती थी उड़कर फिर भी वह बैठी जाती थी बंदर को गुस्सा आ गया उसने पंखा छोड़कर हाथ में तलवार ले ली और इस बार जब मक्खी राजा की छाती पर नहीं गर्दन पर नहीं नाक पर बैठी तो उसने पूरे बल से मक्खी पर तलवार का से हमला किया मक्खी तो उड़ गई किंतु राजा की नाक के दो टुकड़े हो गए राजा मर गया
मूर्ख मित्र की अपेक्षा विद्वान शत्रु ज्यादा अच्छा होता है
Billi Ka nyay बिल्ली और तीतर की कहानी बिल्ली ने करा इंसाफ कहानी नंबर दो
एक जंगल में बहुत बडे वृक्ष के तने में एक खोल के अंदर एक तीतर रहता था एक दिन वह तीतर अपने साथियों के साथ बहुत दूर के खेत में धान की नई-नई कोप्ले खाने चला गया
बहुत रात बीतने के बाद उस वृक्ष के खाली पड़े खोल में एक खरगोश घुस आया और वहीं रहने लगा और उस पर कब्जा कर लिया कुछ दिन कुछ दिन बाद तीतर अचानक ही आ गया धान की नई-नई कोप्ले खाने के बाद वह खूब मोटा ताजा हो गया था और बहुत खुश था
अपनी खोल में आने पर उसने देखा कि वहां एक खरगोश बैठा है उसने खरगोश को अपनी जगह खाली करने के लिए कहा खरगोश भी बहुत तीखे स्वभाव में बोला यह घर अब तेरा नहीं है खूब तालाब और वृक्ष के घरों का यही नियम है कि जो भी उन में बसेरा कर लें उसका ही वह घर हो जाता है घर का स्वामी केवल मनुष्य के लिए होता है पक्षियों के लिए नहीं झगड़ा बढ़ गया अंत में किसी भी तीसरे पंच से इसका निर्णय करने की बात कही उनकी लड़ाई और समझौते की बातचीत को एक जंगली बिल्ली सुन रही थी उसने सोचा मैं ही सरपंच बन जाऊं तो कितना अच्छा है
यह सोच हाथ में माला लेकर बिल्ली सूर्य की ओर मुख करके नदी के किनारे बिछाकर में आंखें मूंद बैठ गई और धर्म का उपदेश करने लगी उसका उसका धर्म का उपदेश सुनकर खरगोश ने कहा यह देखो कोई तपस्वी बैठे है इसी को पंच बनाकर पूछने तीतर बिल्ली को देखकर डर गया दूर से बोला तुम हमारे झगड़े का निपटारा कर दो जिसका पक्ष धर्म विरुद्ध होगा उसे तुम खा लेना यह सुन बिल्ली ने खोली और कहा राम-राम ऐसा ना कहो मैंने हिंसा काल अहिंसा का मार्ग छोड़ दिया है अतः मैं धर्म विरोधी पक्ष की भी हिंसा नहीं करूंगी हां तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है किंतु मैं बुरी हूं दूर से तुम्हारी बात नहीं सुन सकती पास आकर अपनी बात कहो बिल्ली की बात पर दोनों को विश्वास हो गया दोनों ने उसे पंच मान लिया और उसके पास आ गए उसने भी झपट्टा मारकर दोनों को एक ही साथ पंजे में दबोच लिया फिर क्या था फिर दोनों को खा गई और बोली के लो हो गया तुम्हारा फैसला अब घर में मैं रहूंगी
यह सोच हाथ में माला लेकर बिल्ली सूर्य की ओर मुख करके नदी के किनारे बिछाकर में आंखें मूंद बैठ गई और धर्म का उपदेश करने लगी उसका उसका धर्म का उपदेश सुनकर खरगोश ने कहा यह देखो कोई तपस्वी बैठे है इसी को पंच बनाकर पूछने तीतर बिल्ली को देखकर डर गया दूर से बोला तुम हमारे झगड़े का निपटारा कर दो जिसका पक्ष धर्म विरुद्ध होगा उसे तुम खा लेना यह सुन बिल्ली ने खोली और कहा राम-राम ऐसा ना कहो मैंने हिंसा काल अहिंसा का मार्ग छोड़ दिया है अतः मैं धर्म विरोधी पक्ष की भी हिंसा नहीं करूंगी हां तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है किंतु मैं बुरी हूं दूर से तुम्हारी बात नहीं सुन सकती पास आकर अपनी बात कहो बिल्ली की बात पर दोनों को विश्वास हो गया दोनों ने उसे पंच मान लिया और उसके पास आ गए उसने भी झपट्टा मारकर दोनों को एक ही साथ पंजे में दबोच लिया फिर क्या था फिर दोनों को खा गई और बोली के लो हो गया तुम्हारा फैसला अब घर में मैं रहूंगी
राजा और बंदर की कहानी the king and polish monkey
किसी राजा के महल में एक बंदर सेवक के रूप में रहता था वह राजा का बहुत विश्वासपात्र मित्र भक्त था वह बेरोकटोक जा सकता था
एक दिन जब राजा सो रहा था और बंदर राजा को पंखे से हवा कर रहा था तो बंदर ने देखा एक मक्खी बार-बार राजा की नाक पर बैठ जाती थी पंखे से बार-बार हटाने पर भी वह नहीं मानती थी उड़कर फिर भी वह बैठी जाती थी बंदर को गुस्सा आ गया उसने पंखा छोड़कर हाथ में तलवार ले ली और इस बार जब मक्खी राजा की छाती पर नहीं गर्दन पर नहीं नाक पर बैठी तो उसने पूरे बल से मक्खी पर तलवार का से हमला किया मक्खी तो उड़ गई किंतु राजा की नाक के दो टुकड़े हो गए राजा मर गया
मूर्ख मित्र की अपेक्षा विद्वान शत्रु ज्यादा अच्छा होता है
Billi Ka nyay बिल्ली और तीतर की कहानी बिल्ली ने करा इंसाफ कहानी नंबर दो
एक जंगल में बहुत बडे वृक्ष के तने में एक खोल के अंदर एक तीतर रहता था एक दिन वह तीतर अपने साथियों के साथ बहुत दूर के खेत में धान की नई-नई कोप्ले खाने चला गया
बहुत रात बीतने के बाद उस वृक्ष के खाली पड़े खोल में एक खरगोश घुस आया और वहीं रहने लगा और उस पर कब्जा कर लिया कुछ दिन कुछ दिन बाद तीतर अचानक ही आ गया धान की नई-नई कोप्ले खाने के बाद वह खूब मोटा ताजा हो गया था और बहुत खुश था
अपनी खोल में आने पर उसने देखा कि वहां एक खरगोश बैठा है उसने खरगोश को अपनी जगह खाली करने के लिए कहा खरगोश भी बहुत तीखे स्वभाव में बोला यह घर अब तेरा नहीं है खूब तालाब और वृक्ष के घरों का यही नियम है कि जो भी उन में बसेरा कर लें उसका ही वह घर हो जाता है घर का स्वामी केवल मनुष्य के लिए होता है पक्षियों के लिए नहीं झगड़ा बढ़ गया अंत में किसी भी तीसरे पंच से इसका निर्णय करने की बात कही उनकी लड़ाई और समझौते की बातचीत को एक जंगली बिल्ली सुन रही थी उसने सोचा मैं ही सरपंच बन जाऊं तो कितना अच्छा है
यह सोच हाथ में माला लेकर बिल्ली सूर्य की ओर मुख करके नदी के किनारे बिछाकर में आंखें मूंद बैठ गई और धर्म का उपदेश करने लगी उसका उसका धर्म का उपदेश सुनकर खरगोश ने कहा यह देखो कोई तपस्वी बैठे है इसी को पंच बनाकर पूछने तीतर बिल्ली को देखकर डर गया दूर से बोला तुम हमारे झगड़े का निपटारा कर दो जिसका पक्ष धर्म विरुद्ध होगा उसे तुम खा लेना यह सुन बिल्ली ने खोली और कहा राम-राम ऐसा ना कहो मैंने हिंसा काल अहिंसा का मार्ग छोड़ दिया है अतः मैं धर्म विरोधी पक्ष की भी हिंसा नहीं करूंगी हां तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है किंतु मैं बुरी हूं दूर से तुम्हारी बात नहीं सुन सकती पास आकर अपनी बात कहो बिल्ली की बात पर दोनों को विश्वास हो गया दोनों ने उसे पंच मान लिया और उसके पास आ गए उसने भी झपट्टा मारकर दोनों को एक ही साथ पंजे में दबोच लिया फिर क्या था फिर दोनों को खा गई और बोली के लो हो गया तुम्हारा फैसला अब घर में मैं रहूंगी
यह सोच हाथ में माला लेकर बिल्ली सूर्य की ओर मुख करके नदी के किनारे बिछाकर में आंखें मूंद बैठ गई और धर्म का उपदेश करने लगी उसका उसका धर्म का उपदेश सुनकर खरगोश ने कहा यह देखो कोई तपस्वी बैठे है इसी को पंच बनाकर पूछने तीतर बिल्ली को देखकर डर गया दूर से बोला तुम हमारे झगड़े का निपटारा कर दो जिसका पक्ष धर्म विरुद्ध होगा उसे तुम खा लेना यह सुन बिल्ली ने खोली और कहा राम-राम ऐसा ना कहो मैंने हिंसा काल अहिंसा का मार्ग छोड़ दिया है अतः मैं धर्म विरोधी पक्ष की भी हिंसा नहीं करूंगी हां तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है किंतु मैं बुरी हूं दूर से तुम्हारी बात नहीं सुन सकती पास आकर अपनी बात कहो बिल्ली की बात पर दोनों को विश्वास हो गया दोनों ने उसे पंच मान लिया और उसके पास आ गए उसने भी झपट्टा मारकर दोनों को एक ही साथ पंजे में दबोच लिया फिर क्या था फिर दोनों को खा गई और बोली के लो हो गया तुम्हारा फैसला अब
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