राहत इंदौरी के बीस चुनिंदा शेर
गजल अगर इशारों की कला है तो मान लीजिए कि राहत इंदौरी वह कलाकार हैं जो अपने अंदाज में झूम कर इस कला को बापू भी अंजाम देते हैं
डॉ राहत इंदौरी के शेर हर लब्ज के साथ मोहब्बत की नहीं शुरुआत करते हैं
वफात के बाद उनके शहर आज के दौर में भी बहुत खूब
बहुत खूब वायरल है ट्रेंड है आप उन्हें पढ़िएगा खुद से नीचे दिए हुए हैं ध्यान से सुनिएगा
तूफानों से आंख मिलाओ सेलबों पर वार करो
मल्लाह का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
डूबा तो खोल नजर तो मिला जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूं हिसाब तो दे
फूलों की दुकान खोलो खुशबू का व्यापार करो
इश्क खता है तो यह खता एक बार नहीं 100 बार करो
आंख में पानी रखो होठों पर चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीब बहुत सारी रखो
बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास समझ जाए तो धज्जियां उड़ जाए
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किसने दस्तक दी दिल पर यह कौन है
आप तो अंदर है बाहर कौन है
यह हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था
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तेरा नसीब मेरे हाथ कट गए वरना
मैं तेरी मांग में सिंदूर भरने वाला था
अंदर का जहर चूम लिया धूल के आगे आ गए
कितने शरीफ लोग थे सब खुलकर आ गए
कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं कागज की एक नाव लिए चारों तरफ दरिया की सूरत फैली हुई बेकरी है
नहीं अकेले में मिलकर झुंझार दूंगा उसे
जहां-जहां से वह टूटा है उसे जोड़ दूंगा उसे
रोज तारों को नुमाइश में खलन पड़ता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है
हमसे पहले भी मुसाफिर कहीं गुजरे होंगे
कम से कम रह के पत्थर तो हटाते जाते
मोड होता है जवानी कैसा बनने के लिए और
सब लोग यही आंखें फिसलते क्यों हैं
नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से
ख्वाब का आंखें मेरी छत पर टहलते क्यों है
सारी नजर आई थी बस्ती में उसे
वह अलग हट गया आंधी को इशारा करके
रातों से अपना रिश्ता जाने कैसा रिश्ता है
नीद कमरे में जगी है ख्वाजा तो पर बिक रहे हैं
है जमीन एक रोज तेरी ख्वाब में खो जाएंगे सो जाएंगे मरते भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
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ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वह किसी से रजाई मांगे
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Shayri Ghazal kawwali
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